बड़ा सवाल ? आखिर कौन है पेंड्रा का वो ‘खनिज दलाल’? खनिज विभाग का खंडन, लेकिन असली ‘मास्टरमाइंड’ पर चुप्पी क्यों?
महज प्रेस विज्ञप्ति से उठे गंभीर सवाल—क्या सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रहेगी कार्रवाई या बेनकाब होंगे अफवाह फैलाने वाले?
क्या कार्रवाई न कर खनिज विभाग दे रहा है कथित ‘दलाल’ को संरक्षण?
गौरेला पेंड्रा मरवाही: सबसे गंभीर सवाल अब यही है कि यदि विभाग के संज्ञान में रॉयल्टी क्लीयरेंस के नाम पर कथित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला आया है, तो अब तक संबंधित व्यक्ति या नेटवर्क के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या कार्रवाई नहीं किया जाना महज प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर इसके पीछे किसी तरह का संरक्षण काम कर रहा है?

विभाग ने खुद स्पष्ट किया है कि रॉयल्टी भुगतान प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए किसी दलाल या मध्यस्थ को अधिकृत नहीं किया गया है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति विभाग के नाम पर ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना विभाग की जिम्मेदारी बनती है। लेकिन यदि खंडन जारी होने के बाद भी कार्रवाई सामने नहीं आती और वही गतिविधियां कथित रूप से जारी रहती हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभाग किसका इंतजार कर रहा है?
क्या सिर्फ प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देना पर्याप्त है?

यदि विभाग के पास कथित भ्रामक सूचना के स्रोत की जानकारी है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? यदि जानकारी नहीं है, तो दोषी तक पहुंचने के लिए जांच क्यों नहीं की जा रही? और यदि जांच चल रही है, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो क्या संबंधित व्यक्ति को इस निष्क्रियता का लाभ मिल रहा है? क्या कार्रवाई के अभाव में उसके द्वारा ऐसी गतिविधियों को दोबारा अंजाम देने का रास्ता खुला नहीं रह जाता?

खंडन के बाद अगला कदम क्या?
जनता को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं कि सोशल मीडिया पर वायरल सूचना गलत है। अब विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उस सूचना को फैलाने वाला कौन था, उसके खिलाफ क्या जांच हुई और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ क्या वैधानिक कार्रवाई की गई। क्योंकि खंडन से सूचना का जवाब दिया जा सकता है, लेकिन कार्रवाई से ही व्यवस्था की विश्वसनीयता साबित होती है।
अब सवाल सीधे खनिज विभाग से है—क्या कथित दलाल पर कार्रवाई होगी, या फिर खंडन जारी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? अगर कार्रवाई नहीं होती और ऐसी गतिविधियां आगे भी जारी रहती हैं, तो फिर जनता यह सवाल पूछने के लिए मजबूर होगी कि आखिर इस कथित नेटवर्क को संरक्षण कौन दे रहा है?









